Life certificate format for pensioners — जीवन प्रमाण पत्र का फ़ॉर्म और हस्ताक्षर
आजकल ज़्यादातर रक्षा पेंशनधारक साल भर वाला जीवन प्रमाण पत्र SPARSH या जीवन प्रमाण से डिजिटल ही देते हैं। पर काग़ज़ वाला फ़ॉर्म ख़त्म नहीं हुआ — कुछ पेंशनधारकों के लिए वही एक रास्ता बचता है। इस पन्ने पर वही फ़ॉर्म है, जैसा विनियम में छपा है, और वे सारे लोग जो उस पर हस्ताक्षर कर सकते हैं।
यह क्यों ज़रूरी है: "मासिक पेंशन जारी रखने के लिए वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है।" यह रिकॉर्ड ऑफ़िस निदेशालय की अपनी सलाह के शब्द हैं। प्रमाण पत्र नहीं, तो पेंशन नहीं।
फ़ॉर्म, जैसा विनियम में छपा है
यह सेना पेंशन विनियम, भाग-II (2008) का परिशिष्ट-XVIII है, पृष्ठ 150 — वही प्रारूप जिसका ज़िक्र विनियम 81 में है। इसे छापिए, भरिए, और नीचे दी सूची में से किसी एक अधिकारी से हस्ताक्षर करवाइए।
LIFE CERTIFICATE
(Referred to in Regulation 81)
Certified that Shri/Smt holder of PPO No issued by is alive on this date
Date Signature
Name
Designation of Authorised officer
Seal
फ़ॉर्म अंग्रेज़ी में ही रहता है, क्योंकि विनियम में यही प्रारूप छपा है। इसमें और कुछ नहीं लिखना होता — यह बस एक बात कहता है कि पेंशनधारक उस तारीख़ को जीवित है। असली वज़न इस बात का है कि हस्ताक्षर किसने किए।
कौन हस्ताक्षर कर सकता है
विनियम अठारह अधिकारी गिनाता है। इनमें से कोई एक काफ़ी है:
- दंड प्रक्रिया संहिता, 1898 के तहत मजिस्ट्रेट की शक्ति रखने वाला कोई भी व्यक्ति
- पंजीकरण अधिनियम, 1908 के तहत रजिस्ट्रार या उप-रजिस्ट्रार
- ऐसे सेवानिवृत्त अधिकारी जो सेवा के दौरान मजिस्ट्रेट की शक्ति रखते थे
- सरकार का कोई भी राजपत्रित अधिकारी
- मुंसिफ़
- पोस्ट मास्टर
- विभागीय उप-पोस्ट मास्टर
- डाकघरों का निरीक्षक
- भारतीय रिज़र्व बैंक का श्रेणी-I अधिकारी
- भारतीय स्टेट बैंक का अधिकारी
- स्टेट बैंक की सहयोगी बैंक का अधिकारी
- ग्राम पंचायत या गाँव पंचायत का मुखिया
- गाँव की कार्यकारिणी समिति का मुखिया
- RBI अधिनियम, 1934 की दूसरी अनुसूची में शामिल बैंक का अधिकारी — उस पेंशनधारक के लिए जिसकी पेंशन उसी बैंक से आती है
- थाना प्रभारी उप-निरीक्षक (SI) या उससे ऊपर का पुलिस अधिकारी
- लोक सभा, राज्य सभा, विधान सभा या विधान परिषद का सदस्य, नगर निगम का पार्षद या नगरपालिका का सभासद
- पुनर्नियुक्त पेंशनधारक के लिए — उस दफ़्तर के प्रमुख के हस्ताक्षर जहाँ वे दोबारा नौकरी कर रहे हैं
- ज़िला सैनिक कल्याण अधिकारी (DSWO)
ज़्यादातर परिवारों के लिए तीन ही व्यावहारिक हैं — पोस्ट मास्टर, पेंशन देने वाले बैंक का अधिकारी, और ज़िला सैनिक कल्याण अधिकारी।
काग़ज़ वाला रास्ता कब सही है
सलाह में दो हालात लिखे हैं:
- आपके SPARSH PPO में आधार नहीं जुड़ा है। तब जीवन प्रमाण से डिजिटल प्रमाण पत्र "संभव नहीं होगा"। ऐसे में काग़ज़ वाला प्रमाण पत्र "पेंशनभोगी के लॉग इन के माध्यम से स्पर्श पर अपलोड किया जा सकता है"।
- आप वह भी न कर पाएँ, या इंटरनेट ही न हो। सलाह में "दूरस्थ/सीमावर्ती क्षेत्रों" का ज़िक्र है। तब ऊपर वाले प्रारूप में, सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर के साथ, प्रमाण पत्र "डाक द्वारा पीसीडीए (पेंशन) इलाहाबाद को भेजा जा सकता है" — और "संबंधित अभिलेख कार्यालय को भी इसकी एक प्रति ज़रूर भेजें"।
दोनों जगह भेजिए। रिकॉर्ड ऑफ़िस वाली प्रति ही आपको दोबारा की भागदौड़ से बचाती है, अगर पहला लिफ़ाफ़ा कहीं खो जाए।
अगर डिजिटल ही करना है
जीवन प्रमाण पोर्टल पर ये खाने ठीक ऐसे ही भरने होंगे, वरना प्रमाण पत्र SPARSH तक पहुँचता ही नहीं:
- श्रेणी: केंद्र सरकार
- पेंशन स्वीकृति प्राधिकरण: रक्षा-पीसीडीए (पेंशन) इलाहाबाद
- पेंशन वितरण एजेंसी: स्पर्श-पीसीडीए (पेंशन) इलाहाबाद
- PPO नंबर: सिर्फ़ 12 अंकों वाला ePPO या SPARSH PPO नंबर
यही ग़लती एक महीना खा जाती है प्रमाण पत्र "नए पेंशनभोगी" के रूप में जमा कीजिए। ऐसा न करने पर पोर्टल पुराने मान उठा लेता है — पुराना PPO नंबर और पुरानी वितरण एजेंसी — और वह प्रमाण पत्र "स्पर्श को निर्यात नहीं किया जा सकता"। आपकी तरफ़ जमा दिखता है, उनकी तरफ़ पहुँचता ही नहीं।
12 अंकों वाला नंबर पता नहीं? पीसीडीए (पेंशन) पोर्टल (pcdapension.nic.in) पर "Migration into SPARSH" टैब में मिल जाता है। रेजिमेंटल नंबर से खोजना आसान पड़ता है — और सात अंकों वाली सेना संख्या के शुरू में एक शून्य जोड़ना होता है। PPO नंबर कहाँ लिखा है वाला पन्ना पूरा रास्ता बताता है।
नज़दीकी CSC यह काम मुफ़्त करता है
देश भर के चार लाख से ज़्यादा जन सेवा केंद्र — जिन्हें जन सुविधा केंद्र या eMitra कहा जाता है — CGDA और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच हुए समझौते से SPARSH सेवा केंद्र बनाए गए हैं।
कोई पैसा नहीं ले सकता सलाह साफ़ कहती है: इन सेवाओं का शुल्क "सीजीडीए द्वारा सीएससी को सीधे प्रेषित किया जाएगा और पेंशनभोगियों को सीएससी ऑपरेटरों को भुगतान करने की आवश्यकता नहीं है"। कोई ऑपरेटर जीवन प्रमाण पत्र के नाम पर पैसे माँगे, तो वह शुल्क नहीं — ठगी है।
पहुँचा या नहीं, यह कैसे देखें
जिन पेंशनधारकों के प्रमाण पत्र लंबित हैं, उनकी सूची पीसीडीए (पेंशन) पोर्टल पर है और सलाह के शब्दों में "इसे दैनिक आधार पर अपडेट किया जा रहा है"। किसी भी कंप्यूटर से अपना नाम खोजा जा सकता है। पेंशन पहले ही रुक चुकी हो तो पेंशन नहीं आई? वाला पन्ना क्रम बताता है।
अगर पेंशनधारक की मृत्यु हो गई हो
तब जीवन प्रमाण पत्र मत भेजिए। मृत्यु की सूचना देने की प्रक्रिया SPARSH पर Services टैब में है, और पारिवारिक पेंशन का दावा वहीं से आगे बढ़ता है — देखिए कौन सी पारिवारिक पेंशन लागू है और पारिवारिक पेंशन कैलकुलेटर।
यह जानकारी कहाँ से ली गई
- फ़ॉर्म और हस्ताक्षर करने वालों की सूची — परिशिष्ट-XVIII, सेना पेंशन विनियम, भाग-II (2008), पृष्ठ 150; वही प्रारूप जिसका ज़िक्र विनियम 81 में है।
- प्रक्रिया की हर बात — "पेंशनभोगियों द्वारा वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र जमा करने पर सलाह", रिकॉर्ड ऑफ़िस निदेशालय, rodra.gov.in — उसी के साथ यह परिशिष्ट भी नत्थी है। 5 अगस्त 2026 को पूरी पढ़ी गई; इस पन्ने पर उद्धृत हर वाक्य उसी से है।
- पोर्टल स्वयं — jeevanpramaan.gov.in और sparsh.defencepension.gov.in।
Life certificate for pensioners PDF — असली कहाँ मिलेगी
हम फ़ॉर्म की अपनी copy नहीं रखते — और जो साइटें रखती हैं, उनसे सावधान रहिए; किसी अनजान का दोबारा टाइप किया हुआ काग़ज़ वह फ़ॉर्म नहीं होता। ऊपर वाला प्रारूप छाप लीजिए, या सीधे rodra.gov.in से सलाह वाली PDF ले लीजिए — परिशिष्ट उसी का आख़िरी पन्ना है।
ज़रूरी बात: यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी या वित्तीय सलाह नहीं। आपका अपना मामला आपके PPO, पेंशन देने वाले दफ़्तर और रिकॉर्ड ऑफ़िस से तय होता है। सैनिक डेस्क एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।