हमारे बारे में
यह साइट एक भूतपूर्व सैनिक बनाता है, जो सॉफ़्टवेयर भी बनाता है।
यह जोड़ी ही इस साइट की वजह है। पेंशन के बारे में इंटरनेट पर जो लिखा मिलता है, वह ज़्यादातर उन लोगों का है जिन्होंने कभी वर्दी नहीं पहनी — और यह बात उनके काम में दिखती है। कोई सेना के परिवार की पेंशन सिविल कर्मचारियों के नियम से गिन देता है; किसी को पता ही नहीं कि सैन्य सेवा वेतन (MSP) पेंशन में जुड़ता है। जो सेवा को जानते हैं, वे प्रायः वेबसाइट नहीं बना पाते; जो वेबसाइट बना लेते हैं, वे सेवा को नहीं जानते। यहाँ दोनों एक ही जगह हैं।
यह सरकारी साइट नहीं है
नाम में "सैनिक" है, इसलिए यह बात हर पन्ने पर और यहाँ सबसे मोटे अक्षरों में: सैनिक डेस्क का किसी सरकारी संस्था — सैनिक बोर्ड, सैनिक कल्याण कार्यालय, रक्षा मंत्रालय — से कोई संबंध नहीं है। यह साइट केवल यह समझाती है कि सार्वजनिक रूप से जारी नियम और परिपत्र क्या कहते हैं। फ़ैसला हमेशा आपका रिकॉर्ड ऑफ़िस या पेंशन देने वाला दफ़्तर करता है।
नाम क्यों नहीं है
इस साइट पर कोई नाम, रैंक या फोटो नहीं है — यह जान-बूझकर लिया गया फ़ैसला है। भरोसा नाम से नहीं, काम से बनना चाहिए, और वह काम जाँचा जा सकता है: हर आँकड़े के साथ परिपत्र, हर पन्ने पर समीक्षा की तारीख़, सारी दरें एक सार्वजनिक फ़ाइल में, ग़लतियों का सार्वजनिक रजिस्टर, और एक पता जिस पर जवाब मिलता है। जिस दिन इनमें से कोई कड़ी टूटे, भरोसा वापस लेने का हक़ आपका है।
जो यहाँ कभी नहीं मिलेगा
- सेना की सुरक्षा से जुड़ी कोई जानकारी नहीं। किसी रूप में नहीं।
- किसी सैन्य ठिकाने, यूनिट, रिकॉर्ड ऑफ़िस या केंद्र का पता नहीं — तब भी नहीं, जब वह कहीं और छपा हो। जहाँ पता चाहिए, हम यह बताते हैं कि आधिकारिक पोर्टल पर उसे कैसे ढूँढ़ा जाए।
कसौटी सीधी है: जो जानकारी सरकार ने जनता के लिए छापी है, उसे साफ़ समझाना हमारा काम है; जो वर्दी की वजह से पता है, वह यहाँ नहीं आएगी।
साइट किस पर चलती है
न विज्ञापन, न सदस्यता, न कोई बेचने की चीज़ — अभी कुछ नहीं। अगर आगे कभी कुछ बदले, तो वह इसी पन्ने पर लिखा मिलेगा, छिपाकर नहीं।
ज़रूरी बात
यह पन्ना बताता है कि यह साइट क्या है और क्या नहीं। पूरी ज़रूरी बातें यहाँ हैं।