रेलवे वाले और "एक महीने की फ़ौजी ट्रेनिंग" — यह प्रादेशिक सेना है, अग्निवीर नहीं
अक्सर यह बात सुनने को मिलती है — "रेलवे में काम करने वालों को एक महीने के लिए अग्निवीर की ट्रेनिंग पर भेजा जाता है।" ऐसी कोई योजना नहीं है। इस एक बात में तीन अलग-अलग चीज़ें आपस में मिल गई हैं। नीचे तीनों अलग करके रखी हैं।
छोटा जवाब
- अग्निवीर अलग चीज़ है। यह आर्मी, नेवी और एयरफ़ोर्स की सीधी भर्ती है — अग्निपथ योजना के तहत, चार साल की नौकरी। रेलवे कर्मचारी इसके लिए नहीं भेजे जाते।
- जो सुना, वह शायद प्रादेशिक सेना (Territorial Army) की रेलवे इंजीनियर रेजिमेंट है। रेलवे की नौकरी करते-करते कुछ कर्मचारी इसमें भर्ती हो सकते हैं। साल में करीब एक महीने का ट्रेनिंग कैंप होता है, बाक़ी साल वे अपनी रेलवे की नौकरी करते हैं। यह पुराने ज़माने से चला आ रहा है, कोई नई योजना नहीं।
- तीसरी बात — जिन अग्निवीरों के चार साल पूरे हो जाते हैं, उन्हें रेलवे और RPF की भर्ती में आरक्षण मिलता है। यह बात उल्टी है: सेना में चार साल के बाद अग्निवीर रेलवे की नौकरी के लिए फ़ॉर्म भर सकते हैं। रेलवे वाले अग्निवीर को ट्रेनिंग नहीं देते।
प्रादेशिक सेना की रेलवे यूनिट क्या है
प्रादेशिक सेना (Territorial Army) आम लोगों की एक ऐसी सेना है जिसमें पूरी नौकरी नहीं करनी पड़ती। यह प्रादेशिक सेना क़ानून, 1948 (Territorial Army Act) से बनी, और 9 अक्टूबर 1949 को शुरू हुई। लोग अपनी आम नौकरी करते रहते हैं, साल में कुछ दिन फ़ौजी ट्रेनिंग करते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर सरकार उन्हें पूरे समय के लिए बुला सकती है।
इसकी कुछ यूनिट किसी एक महकमे के अपने लोगों की होती हैं — उसी महकमे के कर्मचारी उनमें भर्ती होते हैं। जैसे: रेलवे, इंडियन ऑयल, ONGC, टेलिफ़ोन वाले, फ़ौज के बड़े अस्पताल, और पेड़ लगाने वाली यूनिट।
रेलवे वाली यूनिट को रेलवे इंजीनियर रेजिमेंट (TA) कहते हैं। इनका काम — लड़ाई के समय बॉर्डर के इलाक़ों में रेल की पटरी चालू रखना, फ़ौज की गाड़ियाँ चलाना; और आम दिनों में ज़रूरत पड़ने पर ट्रेनें चलाने में हाथ बँटाना। यही काम ये लोग अपनी रेलवे की नौकरी में भी करते हैं, इसलिए इन्हें पहले से आता है।
भर्ती और ट्रेनिंग — असल में कैसे चलती है
- कौन जुड़ सकता है: सिर्फ़ कुछ ख़ास काम/ट्रेड के रेलवे कर्मचारी। भर्ती से आपकी रेलवे की नौकरी नहीं रुकती।
- ट्रेनिंग कितनी: इन महकमे वाली यूनिट के लिए साल में करीब एक महीना (लगभग 30 दिन) का कैंप। यही वह "एक महीना" है जो अफ़वाह में अग्निवीर से जोड़ दिया जाता है।
- तनख़्वाह: उन दिनों की सेना वाली तनख़्वाह और भत्ते TA में मिले पद के हिसाब से मिलते हैं — रेलवे की तनख़्वाह के ऊपर से। TA ट्रेनिंग के दिन रेलवे में ड्यूटी ही गिने जाते हैं।
- बुलावा: ज़रूरत पड़ने पर पूरी यूनिट को पूरे समय के लिए ड्यूटी पर बुलाया जा सकता है।
2022 में क्या बदला — ज़्यादातर रेलवे TA यूनिट बंद
3 जून 2022 को रेल मंत्रालय ने पाँच रेलवे इंजीनियर रेजिमेंट (TA) बंद करने का फ़ैसला किया — झांसी, कोटा, आद्रा, चंडीगढ़ और सिकंदराबाद वाली।
सिर्फ़ एक यूनिट रखी गई — जमालपुर (बिहार) की 969 रेलवे इंजीनियर रेजिमेंट (TA)। इसे न्यू जलपाईगुड़ी–सिलीगुड़ी–न्यूमाल–अलीपुरद्वार–रंगिया वाली रेल लाइन के लिए रखा गया, जो सिलीगुड़ी के पास की बहुत ज़रूरी लाइन है। यह रक्षा मंत्रालय के कहने पर हुआ। (सरकारी विज्ञप्ति — PIB, PRID 1831523।)
मतलब यह कि आज रेलवे TA में जाने का रास्ता बहुत कम रह गया है — पहले जैसा आम नहीं।
अग्निवीर इससे अलग कैसे है
| अग्निवीर | प्रादेशिक सेना की रेलवे यूनिट | |
|---|---|---|
| कौन | नया भर्ती होने वाला नौजवान, सीधी भर्ती | पहले से रेलवे में काम कर रहा कर्मचारी |
| चुनता कौन है | अग्निपथ रैली या परीक्षा (आर्मी / नेवी / एयरफ़ोर्स) | TA की अपनी भर्ती — लिखित परीक्षा, इंटरव्यू, मेडिकल |
| कितने समय के लिए | चार साल, पूरी नौकरी | साल में करीब एक महीना; बाक़ी साल अपनी रेलवे की नौकरी |
| रेलवे की नौकरी | अग्निवीर बनने के लिए छोड़नी पड़े | चलती रहती है; TA ट्रेनिंग ड्यूटी गिनी जाती है |
| कौन-सा क़ानून / योजना | अग्निपथ योजना, 2022 | प्रादेशिक सेना क़ानून, 1948 |
तीसरी बात — चार साल पूरे कर चुके अग्निवीरों को रेलवे में आरक्षण
2023 में रेल मंत्रालय ने कहा कि जिन अग्निवीरों के चार साल पूरे हो जाएँगे, उन्हें रेलवे की भर्ती में:
- Level-1 पदों में 10% और Level-2 तथा उससे ऊपर के पदों में 5% आरक्षण (यह हर वर्ग के अंदर गिना जाता है, अलग से नहीं);
- उम्र में छूट — पहले बैच को पाँच साल, बाद के बैच को तीन साल;
- दौड़-कूद वाली फ़िज़िकल परीक्षा (PET) से छूट।
इसके अलावा, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) में कांस्टेबल की भर्ती में 10% सीटें ऐसे अग्निवीरों के लिए रखी जाएँगी।
ध्यान दीजिए, बात उल्टी है — "रेलवे वाले अग्निवीर को ट्रेनिंग देते हैं" ऐसा कुछ नहीं। सेना में चार साल पूरे करने के बाद अग्निवीर रेलवे की नौकरी के लिए फ़ॉर्म भर सकते हैं, बस इतना। पूर्व सैनिकों के आरक्षण की पूरी बात सरकारी नौकरी में पूर्व सैनिक आरक्षण वाले पन्ने पर है।
तो यह अफ़वाह कहाँ से आई
तीन अलग बातें हैं — रेलवे TA (पुरानी), अग्निवीर (2022 की नई भर्ती), और चार साल पूरे कर चुके अग्निवीरों को आरक्षण (2023)। बातों-बातों में ये आपस में मिल जाती हैं। "रेलवे वाला + एक महीने की ट्रेनिंग + अग्निवीर" — तीनों बातें अपनी-अपनी जगह सही हैं, पर ये एक ही चीज़ नहीं हैं। ऐसी कोई योजना नहीं है जिसमें रेलवे कर्मचारियों को अग्निवीर बनाकर ट्रेनिंग पर भेजा जाता हो।
यह जानकारी कहाँ से ली गई
- प्रादेशिक सेना — प्रादेशिक सेना क़ानून, 1948 (Territorial Army Act); यह सेना 9 अक्टूबर 1949 को बनी। महकमे वाली यूनिट (रेलवे, IOC, ONGC, टेलिफ़ोन, फ़ौजी अस्पताल, पेड़ लगाने वाली यूनिट) और साल में करीब 30 दिन के कैंप की बात प्रादेशिक सेना की सरकारी जानकारी से — 4 सितंबर 2026 को देखी गई।
- पाँच रेलवे TA रेजिमेंट का बंद होना — रेल मंत्रालय का फ़ैसला, 3 जून 2022; सरकारी विज्ञप्ति PIB PRID 1831523 — झांसी, कोटा, आद्रा, चंडीगढ़ और सिकंदराबाद की यूनिट बंद, और जमालपुर की 969 रेलवे इंजीनियर रेजिमेंट (TA) सिलीगुड़ी वाली रेल लाइन के लिए रखी गई।
- अग्निपथ योजना — कैबिनेट ने 14 जून 2022 को मंज़ूरी दी; सरकारी विज्ञप्ति PIB PRID 1833747।
- अग्निवीरों को रेलवे में आरक्षण — रेल मंत्रालय की 2023 की घोषणा के मुताबिक़: Level-1 में 10%, Level-2 और ऊपर में 5%, उम्र में पाँच या तीन साल की छूट, फ़िज़िकल परीक्षा से छूट; और RPF कांस्टेबल की 10% सीटें।
रेलवे की जो भर्ती सूचना इन आँकड़ों को लागू करती है, वह हमने ख़ुद नहीं देखी — इसलिए इन्हें सरकार की कही हुई बात मानिए, कोई पक्का नियम नहीं। ऊपर की तारीख़ें और यूनिट के नाम सरकारी विज्ञप्तियों (PIB) से हैं।
ज़रूरी बात: यह आम जानकारी है, भर्ती की सलाह नहीं। प्रादेशिक सेना में भर्ती की शर्तें प्रादेशिक सेना और आपका महकमा तय करते हैं; अग्निवीरों के आरक्षण की शर्तें भर्ती करने वाली एजेंसी की सूचना से तय होती हैं। सैनिक डेस्क एक निजी वेबसाइट है, सरकारी नहीं।